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आज मैं अपने गांव जा रहा हूं। मेरा गांव बिहार अब शहर से नाता सा टुट गया था। मेरी रेल है शाम को १० बजे की।मै अपने गांव २ साल बाद जा रहा था। मेरी मां का चिठ्ठी आई थी उसमें लिखा था कि तुम कब आ रहे हो बाबुआ और कह रही थी की कुछ पैसा भेज देते तो कर्ज चुका देती। फिर मैं अपने गांव के लिए निकल पड़ा।
शाम को मेरी रेल थी जो दिल्ली से थी। मै दोपहर को आपना सामन को भर लिया था। बस शाम होने वाली थी। सब चिड़िया अपने घर की तरफ़ जा रही थी। मै भी निकल पड़ा। और मैं अब शहर की गलियां छोड़ दें रहा था। मै स्टेशन पर पहुंच गया हूं। मेरी टेरन आ कर खड़ी थी। जैसे वह मेरा इंतजार कर रही थी। अब मैं बैठ गया शीट पर । अब ट्रेन स्टेशन से छुट गई थी । रात के ११ बज गए थे। खाना खा कर लेट गया और कुछ सोचने लगा कि मैं अपने गांव पहुंचुगा और सब से मिलूंगा मां से मिलूंगा और दोस्तों से मिलूंगा।
मै अपने पहले प्यार रिना मिलूंगा जो मेरी कक्षा में पढ़ती थी। उसके साथ ओ घुमना बर्फ की चुस्की लेते हुए। समय निकल जाता था । स्कूल की डेस्क पर उसका नाम लिखना। साथ में मेला देखना उसके लिए मार खाना । मै बिहार का लड़का था । उसके साथ होली खेलना । बाग में आम खाने जाना ।
मेरा दोस्त सुबू जो मेरा माजक उड़ता था । पर वही मेरा और रिना से मिलने में मदद किया था । वही जाकर रिना को लव लेटर दिया था। पर रिना को नहीं उसकी सहेली को । रिना से सब डरते थे। क्योंकि उसके पिता हमारे गांव प्रधान थे । रिना उनकी बेटी थी ।
कुछ देर बाद मैं देखा बहुत समय हो चुका था। ट्रेन अपने धुन में चली जा रही थी। सब कही न कही सब लेटे थे। फिर मैं भी सो गया। वैसे आधी रात बीत चुकी थी। 🚉🚉🚉🚉
अब सुबह चाली थी 🌅🌅☀️ मैं उठा तो देखा कोई चाय बेच रहा था तो कोई समोसे बेच रहा था। उस समय मैं पटना पहुंच चुका था। मै चाय का एक मिट्टी का कुचर में चाय की चुस्की ली। कुछ देर बाद मेरी रेल चल चुकी थी। फिर मैं देखा रास्ते में किसी की बारत जा रही थी । उसको देखते लेखक मुस्करा दिया। ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

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